Thursday, 24 March 2016

कंप्यूटर से परिचय

कंप्यूटर से परिचय
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1.     कंप्यूटर से परिचय

1.1        परिचय

कंप्यूटर एक मशीन है जोकि हर इंसान के जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है। वेब प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और मोबाइल फोन की क्रांति ने ज्ञान के नए आयाम स्थापित किये है और एक नयी विचार प्रक्रिया को जीवन दिया है । कंप्यूटर पर सतत अनुसंधान एवं विकास की गति के साथ हम यह  कह सकते हैं कि यह हमें जीवन में नए नए अनुभवों से अवगत करवाता रहेगा ।.
चित्र : 1.1 पर्सनल कंप्यूटर

पर्सनल कंप्यूटर गणना, डिजाइन और प्रकाशन प्रयोजनों के लिए छात्रों, इंजीनियरों, रचनात्मक लेखकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। कंप्यूटर ने सीखने की प्रक्रिया को भी बढ़ाया है। विद्यार्थी कक्षा में ही नहीं बल्कि जब वह यात्रा, या पीसी (पर्सनल कंप्यूटर) के साथ घर पर बैठ कर भी पढ़ सकते हैं। इंटरनेट प्रौद्योगिकी से हर व्यक्ति के दरवाजे पर सभी जानकारी लाना संभव हुआ है । लोग अब पूछताछ, बैंकिंग, शॉपिंग और कई और अधिक अनुप्रयोगों के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं। अब हम सूचना सुपर हाइवे के एक युग से गुजर रहे हैं जहां सभी प्रकार की जानकारी सिर्फ कंप्यूटर का एक बटन पर क्लिक करके उपलब्ध की जा सकती है

1.2        कंप्यूटर की पीढ़िया (जेनरेशन)

हम कंप्यूटर पीढ़ियों को पांच मुख्य अवधियों में विभाजित कर सकते है | हर पीढ़ी के कंप्यूटरों को उनके द्वारा उपयोग में ली जाने वाली तकनीक के आधार पर परिभाषित किया गया है | समय के गुजरने के साथ-साथ नए प्रौद्योगिकीय नवाचारों ने जगह ली है और हर बड़ती पीढ़ि के साथ कंप्यूटर की दक्षता में वृद्धि हुई है तथा प्रसंस्करण की लागत में कमी आई  है ।
चित्र : 1.2 कंप्यूटर की पीढियां

1.2.1        प्रथम पीढ़ी (1942-1956)

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में वैक्यूम ट्यूबों एवं डेटा भंडारण के लिए चुंबकीय ड्रम का इस्तेमाल किया गया । उनका आकार काफी बड़ा था; यहां तक कि उन्हें रखने के लिए  एक पूर्ण कक्ष की आवश्यकता होती थी | वे बहुत महंगे थे, गर्मी का उत्सर्जन अत्यधिक था, जिसकी वजह से उन्हें  ठंडा करना बहुत आवश्यक होता था और साथ ही उनका रखरखाव भी बहुत कठिन काम था । पहली पीढ़ी के कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए मशीन भाषा का इस्तेमाल इसकी  प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में किया जाता था | पहली पीढ़ी के कंप्यूटर को इनपुट पंच्ड कार्ड और कागज टेप द्वारा दिया जाता था | पहली पीढ़ी के कंप्यूटर एक समय में एक ही समस्या  को हल करने में सक्षम थे |





 









                    चित्र 1.3: EDVAC                                             चित्र 1.4: वक्युम ट्यूब

1.2.2        दूसरी पीढ़ी (1956-1965)

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में  इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया था । ट्रांजिस्टर कुशल, तेज, कम बिजली की खपत और पहली पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में अधिक सस्ते और विश्वसनीय थे । हालांकि, वे अत्यधिक गर्मी का उत्पादन किया करते थे, लेकिन और अधिक विश्वसनीय भी थे । इस पीढ़ी में, चुंबकीय कोर प्राईमरी मेमोरी और चुंबकीय टेप एवं चुंबकीय डिस्क सेकण्डरी भंडारण (स्टोरेज) उपकरणों  के रूप में इस्तेमाल किया गया था  | कोबोल और फोरट्रान के रूप में उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएँ इस पीढ़ी में शुरू कि गई थी |
Figure 1.5: दूसरी पीढ़ी (CDC 1604)

1.2.3        तीसरी पीढ़ी (1965 – 1975)

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट (आई.सी.) का इस्तेमाल किया गया था | एक एकल आईसी ट्रांजिस्टर, प्रतिरोधों और कैपेसिटर की एक बड़ी संख्या को एक साथ संगठित कर के रख सकता है जिसके कारण कंप्यूटर के आकार को और अधिक छोटा बनाया जा सकता था ।  इस पीढ़ी के कंप्यूटरों द्वारा इनपुट / आउटपुट के लिए कीबोर्ड और मॉनिटर का इस्तेमाल किया गया था ।   ऑपरेटिंग सिस्टम की अवधारणा को भी ईसी समय पेश किया गया था ।  इस पीढ़ी में, समय साझा (टाइम शेयरिंग) और बहु प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (मल्टी प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम) की अवधारणा को पेश किया गया था कई नई उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं की शुरुआत इस पीढ़ी में हुई, जैसे - फोरट्रान, IV, पास्कल, बेसिक इत्‍यादि ।
 











चित्र 1.6: तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर

1.2.4        चतुर्थ  पीढ़ी  (1975 – 1988)

इस पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर की शुरुआत हुई जिनमे हजारों आईसी एक एकल चिप एक सिलिकॉन चिप पर निर्मित की जा सकती थी.
इस पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत बड़े पैमाने पर एकीकृत सर्किट (वीएलएसआई) तकनीक का इस्तेमाल किया करते थे । वर्ष 1971 में इंटेल 4004 चिप विकसित किया गया थाइसमें एक एकल चिप पर एक कंप्यूटर के सभी घटक (कंपोनेंट) स्थित होते है । इस प्रयोग की वज़ह से छोटे  आकार के कंप्यूटर ने जन्म लिया जिसे डेस्कटॉप कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर का नाम दिया गया । इस पीढ़ी में, समय के बंटवारे (टाइम शेयरिंग) की अवधारणा, वास्तविक समय प्रसंस्करण (रियल टाइम प्रोसेसिंग), डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था और साथ ही नयी उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे C, C++, डेटाबेस को इस पीढ़ी में इस्तेमाल किया गया था । 
चित्र 1.7: PDP 11/70

1.2.5        पंचम पीढ़ी (1980 से अब तक)

पांचवीं पीढ़ी के रूप में, एक नई तकनीक उभर कर आई  जिसे ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) कहा जाता है, जिसके अंतर्गत माइक्रोप्रोसेसर चिप में 10 लाख तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक शामिल किया  जा सकता  था | इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस) की अवधारणा, वोइस रिकग्निशन, मोबाईल संचार, सेटेलाई संचार, सिग्‍नल डाटा प्रोसोसिंग को आरम्‍भ किया गया। उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे JAVA, VB और .NET की शुरुआत इस पीढ़ी में हुई |

कंप्यूटर मशीनों के विकास के क्षेत्र में प्रगति के कारण कंप्यूटर व्यापक व उपयोगी हो गया है और हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है । नियमित रूप से चल रहे अनुसंधान और विकास के साथ यह निश्चित है कि हम समय गुजरने के साथ में नए नए नवाचारो का अनुभव करते रहेगे ।

त्वरित समीक्षा
माइक्रो कंप्यूटर क्या है ?
तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में इस्तेमाल किया गया घटक कोनसा था ?

1.3        इलेक्ट्रानिक्स मशीनों का विकास

अबैकस, जो की 5000 साल पहले उभर के आया था उसे  पहले कंप्यूटर के रूप में माना जा सकता है । इस डिवाइस में रैक पर स्लाइडिंग बीड्स (मोती को उपर नीचे करने की प्रकिया) का प्रयोग करके बेसिक गणना की जा सकती थी, लेकिन कागज और पेंसिल के अधिक प्रसार और उपयोग में आने के कारण धीरे धीरे अबेकस का महत्व ख़त्म हो गया. अगला  कंप्यूटिंग डिवाइस जो की तकनीकी द्रष्टि से बेहतर था, के निर्माण में   लगभग 12 शताब्दियों का समय लग गया वर्ष 1642 में, ब्लेस पास्कल ने एक संख्यात्मक पहिया कैलकुलेटर का आविष्कार किया। यह पीतल आयताकार बॉक्स   आठ चल नंबर डायल करके आठ अंको तक की संख्याओं को जोड़ने का कम करती थी । उन्होंने इस मशीन का  नाम पस्कालिन दिया था |

चित्र 1.8: अबेकस
वर्ष 1646 में, एक जर्मन गणितज्ञगोत्फ्रिएद विल्हेम  वॉन लाइबनिट्स (Gotfried Wilhem Von Leibniz) ने पस्कालिन मशीन में सुधार करते हुए एक मशीन बनाई जो की गुणा भी कर सकती थी. लाइबनिट्स मैकेनिकल गुणक गियर और डायल की एक प्रणाली द्वारा काम करता था | इस  मशीन का  1820 तक इस्तेमाल किया गया था, उसके पश्चात  फ्रांसीसी चार्ल्स जेवियर थॉमस डी कोलमार (Charles Xavier Thomas De Colmar) द्वारा  यांत्रिक कैलकुलेटर शुरू किए गए थे , जो की चार बुनियादी गणित कार्यों के प्रदर्शन करने में सक्षम था | यह arithometer के नाम से  नामित किया गया था  इसकी बहुमुखी प्रतिभा के साथ, arithometer व्यापक रूप से प्रथम विश्व युद्ध तक इस्तेमाल किया गया था | कंप्यूटर की वास्तविक शुरुआत, जिसके बारे में आज हम जानते हैंएक गणित के प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) के द्वारा दी गयी थी । एक नई मशीन विकसित की गयी   जो की विभेदक  समीकरणों (differential equations) कों करने में सक्षम थी , और  उसे  Difference Engine  का  नाम दिया गया  ।  यह मशीन भाप के द्वारा संचालित की गयी थी, जो आकार में काफी बड़ी थी और प्रोग्राम  कों स्टोर करने में तथा गणना करने के साथ ही परिणाम कों मुद्रित (प्रिंट) करने में भी सक्षम थी | 10 वर्षों तक  Difference Engine पर काम करने के बाद, बैबेज पहले सामान्य प्रयोजन कंप्यूटर पर काम करने के लिए प्रेरित हुए  और उस मशीन को  विश्लेषणात्मक इंजन (Analytical Engine) का नाम दिया | बैबेज के सहायक अगस्ता एडीए किंग (Augusta Ada King) ने मशीन के डिजाइन बनाने  में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनके काम पर अमेरिका के रक्षा विभाग ने 1980 में उनके सम्मान में एक नयी प्रोग्रामिंग भाषा ADA का नाम  दिया था ।

चित्र 1.9: एनालिटिकल इंजन
चार्ल्स बैबेज द्वारा डिजाइन किया गया विश्लेषणात्मक इंजन (Analytical Engine) आज के मानकों की तुलना में बहुत प्रारंभिक मशीन है | हालांकि, इसमें  आधुनिक सामान्य प्रयोजन कंप्यूटर के बुनियादी तत्वों की चर्चा की गयी है विश्लेषणात्मक इंजन 50,000 से अधिक घटकों से मिलकर बनाया गया था, बेसिक इनपुट डिजाइन पंच्ड कार्ड के रूप में बनाया  गया था इसके अंदर एक ‘मिल’ एवं कंट्रोल इकाई  भी होती है जो की निर्देशों को  किसी भी क्रम में process कर  आउटपुट  मुद्रित परिणाम आउटपुट  device पर देखे जाते थे |

वर्ष 1889 में, एक अमेरिकी आविष्कारक, हरमन होलेरिथ  (Herman Hollerith) ने कंप्यूटिंग के लिए Jacquard हाथकरघा अवधारणा लागू की थी।  वह  अमेरिका की जनगणना की गणना करने के लिए एक तेजी से रास्ता खोज करना चाहते थे।  होलेरिथ की विधि से कार्ड का इस्तेमाल कर डाटा को स्टोर किया जाता था  और परिणामों को ज्ञात किया जाता था | होलेरिथ जो व्यापार की दुनिया में  पंच-कार्ड को लाए थेजिससे आगे चल कर 1924 में आईबीएम (IBM) का उदय हुआ था । अन्य कंपनियों ने भी बाजार में प्रवेश किया और व्यावसायिक उपयोग के लिए पंच रीडर का निर्माण कियासरकारी और गैर- सरकारी दोनों कंपनियों ने वर्ष 1960 तक डेटा प्रोसेसिंग के लिए पंच कार्ड का  इस्तेमाल किया| इसके अलावा, कई अन्य वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को कंप्यूटर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी वानेवर बुश (Vannever Bush) ने वर्ष 1930 में एक अंतर विश्लेषक नामक एक यंत्रवत् संचालित डिवाइस विकसित किया था | यह पहला बार सामान्य प्रयोजन के अनुरूप कंप्यूटर था । जॉन एटानासौफ और बेरी ने वर्ष 1939 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटिंग डिवाइस का निर्माण किया और अपनी पूरी डिजाइन को 1942 में पूरा किया था, यह कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स के सिद्धांत पर और पर और ओन एवं ऑफ की अवधारणा पर तैयार किया गया था । द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, कोलोसस द्वारा कोड ब्रेकर (Code Breakers) विकसित किया गया था, यह पहला  इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था । वर्ष 1946 मेंप्रथम all-purpose इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर ENICAC (इलेक्ट्रॉनिक अंक इंटीग्रेटर और कैलकुलेटर) पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में शुरू किया गया था इस कंप्यूटर में  हजारों की संख्या  में वैक्यूम ट्यूबों का इस्तेमाल किया गया था । यूनीवैक (यूनिवर्सल स्वचालित कंप्यूटर) यह कंप्यूटर सांख्यिक और वर्णमाला दोनों प्रकार डेटा को संभालने के लिए पहला कंप्यूटर था और साथ ही यह पहला वाणिज्यिक कंप्यूटर भी था |


चित्र 1.10: ENICAC (इलेक्ट्रॉनिक न्यूमरल इन्तेग्रटर एंड कैलकुलेटर)

वर्ल्ड वाइड वेब 1990 में अनावरण किया गया था, इसके बाद  आने वाले वर्षों में कई नए ग्राफिकल वेब ब्राउज़र प्रोग्राम उपयोग में आने लगे, वेब और इंटरनेट के प्रसार एवं उपयोग ने सामान्य प्रयोजन (जनरल पर्पस) होम कंप्यूटिंग  के विकास को गति दी । इसने और  सोशल इंटरेक्शन को बढावा दिया । आजकल ऐसे स्मार्ट फोन की बहुत डिमांड है जो टच स्क्रीन हो, जिसमे मोबाइल कनेक्टिविटी हो एवं जिसमे बहुत सारी कंप्यूटर एप्लीकेशन रन करा सकते हो |

1.4        कम्प्यूटर सिस्टम के लाभ

1.4.1        कंप्यूटर सिस्टम - परिभाषा

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है।   कंप्यूटर  ऐसे उपकरणों से बने  होते हैंजो डेटा कों इनपुट करते है, प्रोसेस करते है एवं स्टोर करते है और इच्छित स्वरूप (desired format) में परिणाम देते है । डेटा का मतलब रॉ फैक्ट्स एंड फिगर्स  है । डेटा एक इनपुट डिवाइस के माध्यम से, जैसे की कीबोर्ड, के माध्यम से  कंप्यूटर में इनपुट किया जाता है और कंप्यूटर की मेमोरी में संग्रहीत किया जाता है । इसके बाद यह दिए गए निर्देशों के सेट के अनुसार कार्य (प्रोसेस) करता है । कंप्यूटर परिणाम को आउटपुट डिवाइस के माध्यम से, जैसे की मोनिटर, प्रदर्शित करता है । कंप्यूटर डेटा संसाधित (प्रोसेस) करता है और जानकारी का उत्पादन करता है।   कंप्यूटर केवल विद्युत संकेतों जैसे की बंद और चालू, को ही समझ सकते हैं  जहाँ चालु का मतलब सर्किट ON है एवं बंद का मतलब सर्किट OFF है (बाइनरी सिग्नल्स).
चित्र 1.11 सूचना प्रणाली के घटक

कंप्यूटर एक सूचना प्रणाली (इनफार्मेशन सिस्टम) का हिस्सा है। सूचना प्रणाली के पांच भाग है - डेटा, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, प्रोसीजर एवं पीपल (लोग):
·        पीपल (लोग): लोग सूचना प्रणाली के पांच भागों में से एक है | कंप्यूटर के द्वारा लोगों को अधिक उत्पादक और प्रभावी (मोर प्रोडक्टिव एंड इफेक्टिव) बनाया जा सकता है ।
·        प्रोसीजर: यह वे नियम या दिशा निर्देशों है जोकि लोग सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर एवं डाटा का उपयोग करते समय पालन करते है। इन प्रक्रियाओं को आमतौर पर कंप्यूटर विशेषज्ञों द्वारा लिखा व पुस्तिकाओं में दर्ज किया गया हैं।
·        सॉफ्टवेयर: एक प्रोग्राम जो दिशा निर्देशों का सेट होता है और कंप्यूटर को बताता है की स्टेप बाय स्टेप कैसे कार्य करना है. प्रोग्राम या सेट ऑफ़ प्रोग्राम्स का दूसरा नाम सॉफ्टवेयर है।
·        हार्डवेयर: वह उपकरण जो डेटा को प्रोसेस कर सुचना में बदल देता है| इनमे कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, प्रणाली इकाई, और अन्य उपकरण शामिल हैं। हार्डवेयर सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
·        डेटा: कच्चे (रॉ), असंसाधित तथ्यों,जैसे कि पाठ, संख्या, इमेज और ध्वनियों को डेटा कहा जाता है।  प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) डेटा से जानकारी अर्जित करते है।

1.4.2        कंप्यूटर की विशेषताएं

1.       गति (स्पीड): कंप्यूटर बहुत ही उच्च गति पर डेटा को प्रोसेस   करता है ।  कंप्यूटर डेटा की एक बड़ी मात्रा को संसाधित (प्रोसेस) करने के लिए केवल कुछ ही सेकंड लेता है अर्थात एक लाख निर्देशों को एक सेकण्ड में ही संसाधित किया जा सकता है ।
2.       शुद्धता (एक्यूरेसी): एक कंप्यूटर द्वारा उत्पादित परिणाम पूर्णरूप से  सही होते हैं । यदि कंप्यूटर में सही डेटा दर्ज किया गया है तो प्राप्त परिणाम एकदम सटीक होगा । कंप्यूटर GIGO (Garbage In Garbage Out) के सिद्धांत पर काम करता है ।
3.       उच्च संचयन क्षमता (हाई स्टोरेज कैपेसिटी): कंप्यूटर की मेमोरी बहुत ही विशाल होती हैऔर एक बहुत ही कॉम्पैक्ट ढंग से डेटा को एक बड़ी मात्रा में स्टोर कर सकते हैं ।  कोई भी जानकारी या डेटा कंप्यूटर में एक लंबे समय तक के लिए स्टोर रहता है | इस सुविधा के साथ, पुनरावृत्ति से  बचा  जा सकता है।
4.       विविधता: कंप्यूटर अनेक प्रकार के कार्यों को  करने में  उपयोग किया जा सकता है, जैसे की हम पत्र लिखने के लिए, पत्रक तैयार करने, संगीत सुनने, वस्‍तु सूची के प्रबन्‍धन, अस्पताल प्रबंधन, बैंकिंग और कई और प्रकार के कार्य  कर सकते हैं ।
5.       परिश्रमशीलता (डिलिजेंस): एक मशीन होने के नाते, एक कंप्यूटर थकान, एकाग्रता की कमी और बोरियत से मुक्त होता है ।  कंप्यूटर जिस गति से पहले निर्देश को  संसाधित करता है, उसी गति से आखरी निर्देश को  संसाधित करने में सक्षम होता है |

सीमा (लिमिटेशन): कम्प्यूटर एक मूक मशीन है और वह स्‍वयं कुछ नहीं कर सकता है | कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जोकि डाटा को ग्रहण करने की क्षमता रखता है एवं दिए हुए दिशा निर्देशों की पालना करते हुए इनफार्मेशन या सिग्नल के रूप में आउटपुट देता है | एक अप्रत्याशित स्थिति में, कंप्यूटर अपने दम पर कोई भी निर्णय नहीं ले सकता है ।  निर्देशों के क्रम को  कंप्यूटर से नहीं बदला जा सकता है | कम्‍प्‍यूटर का आईक्‍यू (Intelligent Quotient) नहीं होता है।

1.5        हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर

1.5.1        सॉफ्टवेयर

हम कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार के कार्यों को संपन्न कर सकते है ।  असल में सभी प्रक्रियाएँ सॉफ्टवेयर की मदद से कि जाती है जो किसी एक सेकण्डरी मेमोरी डिवाइस में संग्रहित हो जाती है ।   सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का एक और नाम है ।  सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का संग्रह है जो एक विशेष प्रयोजन (स्पेशल पर्पस) के लिए लिखा गया है ।  एक प्रोग्राम कुछ भी नहीं बस एक निर्देशों का समूह है  जो की किसी एक विशेष प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा गया है ।  सॉफ्टवेयर के दो प्रमुख प्रकार हैं:   सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर । इन दोनों सॉफ्टवेयरों के अपने अपने कार्य क्षेत्र है ।
चित्र: 1.12 सॉफ्टवेर के प्रकार

1.5.1.1       सिस्टम सॉफ्टवेयर

सिस्टम सॉफ्टवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो पहले उपयोगकर्ता से सूचना का आदान प्रदान करता है और फिर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के साथ काम करता है । सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को अपने आंतरिक संसाधनों का प्रबंधन करने में मदद करता है | सिस्टम सॉफ्टवेर सिर्फ एक प्रोग्राम नहीं है, बल्कि कई प्रोग्रामों का एक संग्रह है । सिस्टम प्रोग्राम्स के महत्वपूर्ण घटक निम्न प्रकार है:
·        ऑपरेटिंग सिस्टम (O.S.): ऑपरेटिंग सिस्टम सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो की कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर संसाधनों (सीपीयू , मेमोरी , इनपुट और आउटपुट आदि ) का प्रबंधन और कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए आम सेवाएं प्रदान करता है । यह कंप्यूटर और उपयोगकर्ता (यूजर) के बीच एक इंटरफेस प्रदान करता है।   विंडोज ओएस (Windows OS) कंप्यूटर पर सबसे अधिक और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम में से एक है |  लिनक्स और यूनिक्स ओएस भी कुछ विशेष प्रकार की एप्लीकेशन में इस्तेमाल किया जाता है । वे कई प्रकार के होते हैं, जैसे एम्बेडेड (embedded), वितरित (distributed), वास्तविक समय (real time) आदि |
·        यूटिलिटीज: यूटिलिटीज  विभिन्न प्रकार की सेवाएँ हैं जो की   ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा प्रदान की जाती हैं ।  यूटिलिटीज जैसे डिस्क फ्रेग्मेंटर अवांछनीय फ़ाइल को हटाने एवं डिस्क के संसाधनों को पूर्ण रूप से काम में लेने के लिए उपयोगी होती हैं | इस सुविधा के द्वारा हम डिस्क स्पेस को भी व्यवस्थित कर सकते हैं |
·        डिवाइस ड्राइवर:   ये एक तरह के विशेष प्रोग्राम होते है जो  अन्य इनपुट और आउटपुट डिवाइस को बाकी के कंप्यूटर प्रणाली के साथ संवाद (कम्यूनिकेट) करने की अनुमति प्रदान करते है
·        सर्वर : सर्वर की आवश्यकता तब पड़ती है जब अलग अलग यूजर द्वारा किये गये अनुरोधों कों पूरा करने के लिए  विभिन्न  प्रकार के प्रोग्राम कों रन करने की जरुरत होती है |
टेबल  1.1 एप्लीकेशन एवं सिस्टम सॉफ्टवेर

1.5.1.2       एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वो सॉफ्टवेयर है जो विशेष रूप से उपयोगकर्ताओं (यूजर) के लिए तैयार किये जाते है – इनको एंड यूजर प्रोग्राम्स भी कहते है । कुछ प्रोग्राम्स जैसे वर्ड प्रोसेसर, वेब ब्राउज़र, एक्सेल एप्लीकेशन सॉफ्टवेर की श्रेणी में आते है | इन प्रोग्रामों कों बेसिक या स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।.

बेसिक एप्लीकेशन: इन एप्लिकशनों को व्यापक रूप से जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है:
·        व्यापार
·        शिक्षा
·        चिकित्सा विज्ञान
·        बैंकिंग
·        इंडस्ट्रीज

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग आप अनेक कामों के लिये कर सकते है जैसे संदेश भेजने, दस्तावेज़ तैयार करने, स्प्रेडशीट बनाना, डेटाबेस, ऑनलाइन शॉपिंग आदि | एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर  कि इस तरीके से तैयार किये जाते है जिससे उपयोगकर्ता के लिये काम करना लिए बेहद आसान हो जाता है ।  उदाहरण के लिए यदि कोई उपयोगकर्ता किसी भी वर्ड (MS Word) फ़ाइल बनाता तो उसे margin, line spacing, font साइज़ पहले से ही सेट मिलता है जिसे वो अपने अनुसार चेंज कर सकता है|   उपयोगकर्ता (यूजर) डॉक्यूमेंट में रंग भरने, शीर्षकों, और तस्वीरें आवश्यकता अनुसार जोड़ सकते हैं |

उदाहरण: - एक वेब ब्राउज़र एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेर ही जिसे विशेष रूप से इंटरनेट पर पाई जाने वाली इनफार्मेशन एवं कंटेंट खोजने के लिए तैयार किया गया है ।

वेब ब्राउज़र के नाम: इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer),   मोज़िला फायरफोक्स (Mozilla Firefox),   गूगल क्रोम (Google Chrome) एवं  सफारी (Safari)

स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन में हजारों अन्य प्रोग्राम है जोकि विशिष्ट विषयों और व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करते है । कुछ सबसे अच्छे प्रोग्राम्स है - ग्राफिक्स, ऑडियो, वीडियो, मल्टीमीडिया, वेब लेखन, और कृत्रिम बुद्धि (artificial intelligence)

टिप : एक सॉफ्टवेयर सूट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयरों का एक समूह है जो सम्बंधित फंक्शनलिटी के लिये बना होता है |   उदाहरण के लिए ऑफिस सॉफ्टवेयर सूट में वर्ड प्रोसेसिंग, स्प्रेडशीट, डेटाबेस, प्रेजेंटेशन और ईमेल शामिल हो सकते है।

उपयोगी तथ्य

त्वरित समीक्षा
कुछ एप्प्लिकेशन सॉफ्टवेयर के  नाम बताईये ।
वेब ब्राउज़र क्या है ?

1.5.2        हार्डवेयर

हार्डवेयर - एक सामान्य शब्द है जोकि कंप्यूटर प्रणाली के किसी भी घटक (कंपोनेंट) की भौतिक उपस्थिति का वर्णन करने के लिए तथा जिसे देखा और छुआ जा सके इसमें कंप्यूटर केस, मॉनीटर, कीबोर्ड और माउस भी शामिल है। इस तरह से कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, प्रिंटर, मदरबोर्ड, मेमोरी चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, एक्सपेंशन कार्ड, केबल, स्विच और जिसे आप  छू कर और महसूस कर सकते है वे उपकरण शामिल हैं।

हार्डवेयर components कों अक्सर इनपुट, आउटपुट, स्टोरेज या प्रोसेसिंग components के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं । हार्डवेयर components जो सीपीयू (CPU) का एक अभिन्न हिस्सा नहीं हैं उन्हें पेरिफेरल उपकरणों (peripheral devices) के रूप में संदर्भित किया जाता है; पेरिफेरल उपकरणों को आमतौर पर इनपुट, स्टोरेज या आउटपुट (जैसे हार्ड डिस्क, कीबोर्ड या प्रिंटर) के लिए उपयोग किया जाता है।

इनपुट डिवाइस एक ऐसी हार्डवेयर डिवाइस है यूजर से इनफार्मेशन स्वीकार करती है, इनफार्मेशन को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में कन्वर्ट करती है और उसके बाद प्रोसेसर को संचारित (ट्रांसमिट) करती है | इनपुट डिवाइस का मुख्य कार्य मनुष्य (Humans) को कंप्यूटर के साथ इंटरेक्शन करवाना होता है | उदाहरण के लिए अगर आप कंप्यूटर पर गेम खेल रहे हो तो माउस पॉइंटर (यूजर इंटरफेस के डिजाइन में एक आम तत्व) के द्वारा आप नेविगेशन कण्ट्रोल कर सकते है |

आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर सिस्टम से इनफार्मेशन लेता और ऐसी रूप में परिवर्तित करता है जिसको मनुष्यों (Humans) द्वारा आसानी से समझा जा सकता है । उदाहरण लिए मॉनिटर यूजर के लिए प्रोसेसर के द्वारा प्रोसेस की गयी इनफार्मेशन को विसुअल डिस्प्ले के द्वारा दिखाता है |

प्रोसेसिंग डिवाइस कंप्यूटर के भीतर इनफार्मेशन  की प्रोसेसिंग के लिए जिम्मेदार कंपोनेंट हैं। इनमे सीपीयू, मेमोरी और मदरबोर्ड डिवाइस शामिल हैं।

स्टोरेज डिवाइस एक ऐसा कंपोनेंट हैं जो कंप्यूटर के भीतर डेटा संग्रहीत करने की अनुमति प्रदान करता है। इनमे हार्ड डिस्क ड्राइव और कॉम्पैक्ट डिस्क ड्राइव शामिल हैं।

Component
Example (उदाहरण)
इनपुट
ट्रैकबॉल, टच पैड, माइक्रोफोन, कीबोर्ड, सेंसर, माउस, जोस्टिक, स्‍केनर, वेब केमरा
प्रोसेसिंग
मदरबोर्ड, प्रोसेसर(सीपीयू), मेमोरी
आउटपुट
मॉनिटर, प्रिंटर, हैडफ़ोन, स्पीकर, टचस्क्रीन, प्रोजेक्टर इत्यादि.
स्टोरेज
हार्ड डिस्क ड्राइव
टेबल  1.2 हार्डवेयर के प्रकार












बहुविकल्पी प्रश्न

1.       दूसरी जनरेशन (पीड़ी) में पेश की हाई हाई लेवल प्रोग्रामिंग भाषा (लैंग्वेज) है:
a.       FORTRAN IV, PASCAL, BASIC b. C/C++ c. COBOL और FORTRAN d.  इनमे से कोई नहीं
2.       पहली जनरेशन (पीड़ी) के कंप्यूटर का मुख्य कंपोनेंट था:
a.       ट्रांजिस्टर b. वैक्यूम टूबस और वाल्वस c. इंटीग्रेटेड सर्किट्स d. इनमे से कोई नहीं
3.       दूसरी जनरेशन (पीड़ी) कंप्यूटर कब विकसित किया गए थे?
a. 1949 से 1955  b. 1956 से 1965  c. 1965 से 1970  d. 1970 से 1990
4.       माइक्रो प्रोसेसर कौनसी जनरेशन (पीड़ी) में पेश किया गया था?
a.       पहली जनरेशन  b. दूसरी जनरेशन  c. तीसरी जनरेशन  d. चौथी जनरेशन  
5.       इनमे से कौनसा एप्लीकेशन सॉफ्टवेर का उदाहरण नहीं है ?
      a. विंडोज 7 b. पेज मकर c. नोटपैड d. फोटोशोप
6.       इनमे से कौन कंप्यूटर हार्डवेयर पर रन करता है और दुसरे सॉफ्टवेर को रन करने के लिये प्लेटफार्म प्रदान करता है?
a. ऑपरेटिंग सिस्टम b. एप्लीकेशन सॉफ्टवेर c. A and B d. इनमे से कोई नहीं
7.       ENIAC का विस्तारित रूप है:
a. Electronic Networks Integrated Ace Computer b. Electronic Numerical Integration and Calculation c. Electronic Numerical Integrator & Computer d. Electronic November Is A Crossing
8.       रॉ फैक्ट्स जैसे लेटर्स, वर्ड्स एंड ध्वनि को क्या कहा जा सकता है:
a. डाटा b. यूजर रेस्पोंसे c. प्रोग्राम d. कमांड
9.       आउटपुट डिवाइस का एक उदाहरण है :
a. स्कैनर b. प्लॉटर c. टेप d. सॉफ्टवेर
10.   इनमे से कौन कंप्यूटर की लिमिटेशन को परिभाषित करता है:
a. गति b. शुद्धता c. परिश्रमशीलता d. कोई IQ नहीं

प्रश्न संख्या- सही जवाब
1 – c
2 – b
3 – b
4 – d
5 – a
6 – a
7 – c
8 – a
9 – b
10 – d





कंप्यूटर सिस्टम
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2.     कंप्यूटर सिस्टम

 

2.1        प्रस्तावना

कंप्यूटर सिस्टम अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरीफेरल्स (peripherals) या इनपुट / आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है कंप्यूटर पेरीफेरल्स को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस और इनपुट / आउटपुट डिवाइस में विभाजित किया जा सकता है
चित्र  2.1 इनपुट / आउटपुट डिवाइस

2.2         इनपुट डिवाईसेज़

2.2.1        कीबोर्ड

कंप्यूटर कीबोर्ड सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले इनपुट डिवाइस में से एक है जिसके द्वारा संख्या (numbers), अक्षर (alphabets) और विशेष करक्टेर (special characters) को कंप्यूटर में इनपुट किया जाता है | Keyboard का उपयोग कंप्यूटर को किसी विशेष कार्य आदेशित करने के लिये भी किया जा सकता है | एक कीबोर्ड में alphabetic एवं numeric keys होती है जिसका उपयोग टेक्स्ट एवं न्यूमेरिक डाटा को इनपुट करने के लिये किया जाता है | कीबोर्ड पर कई तरह की एडिटिंग कीज़ (editing keys) एवं फ़ंक्शन कीज़ (function keys) होती हैं जो सीधे फंक्शन को शुरू करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं । Caps Lock/Num Lock/Scroll Lock key को टॉगल key कहा जाता है जो किसी विशेष फीचर को ON / OFF करने के लिये इस्तेमाल होती है । Ctrl / Alt key को कॉम्बिनेशन key भी कहा जाता है क्यों की यह दूसरी keys के साथ कॉम्बिनेशन (साथ में) में प्रयोग में ली जाती है | अधिकांश कीबोर्ड नंबर्स इनपुट करने के लिए अलग संख्यात्मक पैड / अनुभाग (numeric keypad) के साथ आते हैं। 
चित्र 2.2 कीबोर्ड

2.2.2        पॉइंटिंग डिवाइस

ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUIs), जो कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं, में स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति बताने के लिए पोइंटिंग डिवाइस की आवश्यकता होती है | पॉइंटिंग डिवाइसेज़ निम्न प्रकार से हैं, जैसे : माउस, ट्रैकबॉल, टच पैड, ट्रैक बिंदु, ग्राफ़िक्स टैबलेट, जोयस्टिक एवं टच स्क्रीन। अधिकतर पॉइंटिंग डिवाइसेज़ कंप्यूटर से एक यूएसबी (USB) पोर्ट के माध्यम से जुड़े होते हैं।

2.2.2.1       माउस

माउस सबसे लोकप्रिय पॉइंटिंग डिवाइस है जो यूजर एक हाथ के साथ कार्य (मूव ) करता है। पुराने माउस में उसके तल में एक बॉल होती थी जो की माउस के निचले भाग की सतह पर होती थी | उसमे आंतरिक रोलर्स बॉल के मूवमेंट को सेंस करके माउस कोर्ड (केबल) के माध्यम से कंप्यूटर को संचारित करते थे | आजकल ऑप्टिकल माउस क प्रचलन है जिसमे रोलिंग बॉल का उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसके स्थान पर एक प्रकाश और छोटे सेंसर का उपयोग किया जाता है, जो मेज की सतह के एक छोटे से भाग से माउस की मूवमेंट का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह तार रहित या वायरलेस माउस रेडियो तरंगों के माध्यम से कंप्यूटर के साथ संचार बनाए रखता है ।
चित्र 2.3 – माउस
माउस में स्क्रॉल व्हील्स (पहिये) भी हो सकते है जो कि जीयूआई (GUI) के साथ काम करने में सहायक सिद्ध हो सकते है | पारंपरिक पीसी माउस में  दो बटन होते है जबकि (Macintosh) मैकिनटोश माउस में एक ही बटन होता है।

2.2.2.2       टच-पैड

आजकल अधिकांश लैपटॉप कंप्यूटर्स में एक टच-पैड पॉइंटिंग डिवाइस  होती है। यूजर टच-पैड की सतह पर उंगली को फिराकर या फिसला कर स्क्रीन पर कर्सर को एक जगह से दूसरी जगह मूव (move) करते हैं । लेफ्ट एवं राईट क्लिक बटन पैड के नीचे स्थित होते हैं । टच-पैड इस्तेमाल करने के लिये माउस  कि अपेक्षा बहुत कम जगह कि जरुरत पड़ती है और इनमें कोई मूविंग (चलित) भाग भी नहीं होता है |

चित्र 2.4 - टच पैड

2.2.2.3       ट्रेक पॉइंट

आईबीएम थिंक पैड जिसमें टच पैड के लिए भी जगह नहीं होती है, के अंदर प्राय: एक ट्रैक पॉइंट होता है जो कि एक छोटी रबर प्रोजेक्शन कीबोर्ड की keys के बीच एम्बेडेड होता है। ट्रेक पॉइंट एक छोटे जोयस्टिक की तरह कार्य करता है| इसे कर्सर की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

2.2.2.4       ट्रैकबॉल

ट्रैकबॉल भी एक माउस की तरह ही होता है, जिसमें बॉल शीर्ष (टॉप) पर स्थित होती है। हम ट्रैकबॉल को रोल करने के लिए उंगलियों का उपयोग करते हैं और आंतरिक रोलर्स इस मूवमेंट को सेंस करके निर्देशों को कंप्यूटर तक पहुंचाते हैं। ट्रैकबॉल डेस्क पर स्थिर बनी रहती है, और इसकी वजह से हमें ट्रैकबॉल का उपयोग करने के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं होती है। आजकल ऐसे ऑप्टिकल ट्रैकबॉल उपलब्ध हैं जिनमें रोलर्स की जरूरत नहीं होती है और व्हील्स के गंदे होने की भी कोई समस्या नहीं होती है ।

2.2.2.5       जॉयस्टिक्स

जॉयस्टिक्स और दूसरे गेम नियंत्रक (कंट्रोलर्स) भी पॉइंटिंग डिवाइस के रूप में कंप्यूटर से जोड़े जा सकते हैं। वे आम तौर पर खेल खेलने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
चित्र 2.5 - जॉय स्टिक्‍स

2.2.2.6       ग्राफिक्स टैबलेट

ग्राफ़िक्स टैबलेट में इलेक्ट्रॉनिक लेखन क्षेत्र (इलेक्ट्रॉनिक राइटिंग एरिया) होता है जिसमे स्पेशल पेन को यूज़ किया जाता है | ग्राफ़िक्स टैबलेट के द्वारा आर्टिस्ट ग्राफिकल इमेजेज (मोशन सहित) बना सकता है जैसा की परंपरागत ड्राइंग डिवाइस में किया जाता है | ग्राफिक्स टेबलेट का पेन दबाव के प्रति संवेदनशील (प्रेशर सेंसिटिव) होता है, जिसके परिणाम स्वरूप ज्यादा या कम दबाव पड़ने पर वो अलग अलग चौड़ाई के ब्रश स्ट्रोक प्रदान करता है ।

चित्र 2.6 – ग्राफ़िक्स टेबलेट

2.2.3        स्कैनर

एक स्कैनर मुद्रित पृष्ठ (प्रिंटेड पेज) या ग्राफ़िक का डिजिटलीकरण करता है, उसको छोटे छोटे पिक्सल्स वाली इमेज (अलग अलग ब्राइटनेस एवं कलर के साथ) में परिवर्तित करके कंप्यूटर को संचारित (ट्रांसमिट) करता है |

चित्र 2.7 –स्कैनर


           यह लेजर तकनीक का उपयोग करके प्रिंटेड इनफार्मेशन को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में परिवर्तित करता है | स्कैनर किसी भी तरह की इनफार्मेशन को स्कैन कर सकता है जैसे हाथ से लिखा हुआ टेक्स्ट, इमेज, चित्र, प्रिंटेड पेज आदि | एक बार स्कैन होने के बाद स्कैन्ड इनफार्मेशन को कंप्यूटर में स्टोर किया जा सकता है या फिर प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया जा सकता है |

2.2.1        मिडी (MIDI) डिवाइस

मिडी (MIDI) (Musical Instrument Digital Interface - संगीत यंत्र डिजिटल इंटरफ़ेस) एक प्रणाली है जो  इलेक्ट्रॉनिक संगीत वाद्य यंत्र के बीच सूचना प्रसारित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनके द्वारा मिडी कीबोर्ड को कंप्यूटर से जोड़ा जा सकता है और एक कलाकार कंप्यूटर सिस्टम द्वारा कैप्चर किये गए संगीत (जो की एक समय क्रम में संगीत बद्ध किया गया है) को प्ले कर सकता है |

2.2.2        मैग्नेटिक इंक करैक्टर रेकोग्निशन (MICR)

मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रेकोग्निशन कोड (एमआईसीआर कोड) एक करैक्टर पहचाने की तकनीक है जो मुख्य रूप से बैंकिंग उद्योग द्वारा प्रोसेसिंग को कम करने तथा चेक और अन्य दस्तावेजों की क्लीयरिंग में काम आता है। यह एमआईसीआर कोड करैक्टर को डिजिटल डाटा में बदल देता है जो कंप्यूटर समझ सकता है |

2.2.3        ऑप्टिकल मार्क रिडर (OMR)

यह एक विशेष स्कैनर है जो पेंसिल या पेन द्वारा किए गए निशान के एक पूर्व निर्धारित प्रकार की पहचान करने के लिए उपयोग होता है| सबसे आम उदाहरण परीक्षाओं में प्रयोग किये जाने वाली उत्तर पुस्तिका, ओएमआर उत्तर पुस्तिका को स्कैन कर आउटपुट के रूप में परिणाम का उत्पादन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। ओएमआर सर्वेक्षण, चुनाव और परीक्षणों में भी प्रयोग किया जाता है।

2.2.4        ऑप्टिकल करैक्टर रेकोग्निशन (OCR)

ऑप्टिकल कैरेक्टर रेकोग्निशन (ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर) (ओसीआर) मशीन एनकोडेड फॉर्म में इमेजेज (टाइप्ड), प्रिंटेड या हस्तलिखित टेक्स्ट का इलेक्ट्रॉनिक रूपांतरण करता है | यह व्यापक रूप से स्वचालित (ऑटोमेटेड) डाटा एंट्री के लिये इस्तेमाल किया जाता है जैसे OCR यूज़ करके प्रिंटेड पेपर डाटा रिकार्ड्स, पासपोर्ट दस्तावेजों, बैंक चालान, बैंक स्टेटमेंट, कम्प्यूटरीकृत रसीदें, बिज़नस कार्ड, मेल आदि के डाटा को स्कैन करके डिजिटल फॉर्म में परिवर्तित कर सकते है | यह प्रिंटेड टेक्स्ट्स को  डिजिटाइज़ करने का सबसे आम तरीका है जिससे यह डाटा इलेक्ट्रॉनिक रूप से एडिट, सर्च, ऑनलाइन डिस्प्ले किया जा सकता है और इसके बाद इसको मशीन प्रक्रियाओं जैसे मशीन अनुवाद, टेक्स्ट का स्पीच में परिवर्तन और पाठ खनन (text mining) में उपयोग कर सकते है।

2.2.5        बार कोड रीडर


बार कोड एक वस्तु (ऑब्जेक्ट) को मशीन द्वारा विशिष्ट रूप से पहचानने का एक तरीका है | हर एक ऑब्जेक्ट को विशिष्ट रूप से पहचानने के लिये एक कोड दिया जाता है जिसे एक मशीन के द्वारा पढ़ा जा सकता है |